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Friday, December 14, 2018

जन्माष्टमी पर निबंध (Essay On Janmashtami In Hindi) 593 words

December 14, 2018


जन्माष्टमी का त्यौहार सभी हिन्दुओं के लिए एक बहुत ही प्रमुख त्यौहार होता है  इसे भगवान कृष्ण की जयंती के रूप में मनाया जाता है इसी लिए इसे कृष्ण जन्माष्टमी कहते हैं। इसे कई अन्य नामों से भी जाना जाता है जैसे – कृष्णाष्टमी , गोकुलाष्टमी , अष्टमी रोहिणी , श्री कृष्ण जयंती , श्री जयंती आदि। 
जन्माष्टमी को सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में रहने वाले भारतीय भी बड़ी आस्था और उल्लास के साथ मनाते हैं।
श्री कृष्ण का जन्म : श्री कृष्ण का जन्म रात के 12 बजे उनके मामा कंस के कारागार में हुआ था। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार कृष्ण जन्माष्टमी श्रावण माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी के दिन रोहिणी नक्षत्र में पडती है। इनके पिता का नाम वासुदेव और माता का नाम देवकी था।  यह त्यौहार अगस्त या सितम्बर में पड़ता है।
कृष्ण जन्माष्टमी से एक दिन पहले सप्तमी के दिन लोग वृत रखते हैं और आधी रात 12 बजे कृष्ण का जन्म होने के बाद घंटियाँ बजाकर श्री कृष्ण की आरती की जाती है। इसके बाद लोग अपने रिश्तेदारों और पड़ोसियों में प्रसाद बाँटकर ख़ुशी प्रकट करते हैं। उसके बाद वे खुद खाना खाते हैं। इस तरह से पुरे दिन वृत रखकर यह त्यौहार मनाया जाता है।

मातृत्व उपहार के लिए सभी विवाहित औरतें इस दिन वृत रखती हैं। ऐसा माना जाता है कि जो जन्माष्टमी के दिन पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ इस वृत को पूरा करती हैं उन्हें इस वृत का फल एक बच्चे के आशिर्वाद के रूप में मिलता है। जो महिलाएं अविवाहित होती हैं वो भविष्य में एक अच्छे बच्चे की कामना के लिए इस दिन का वृत रखती हैं।
 लोग सूर्योदय से पहले उठकर नहा-धोकर साफ-सुथरे वस्त्र पहनकर तैयार हो जाते हैं। वे कृष्ण के मन्दिर जाते हैं और प्रसाद , धूप , बत्ती , दिया , फूल , फल , भोग और चन्दन चढाते हैं। वे भक्त गीतों को गाते हैं  बाद में वे कृष्ण जी की मूर्ति की घी के दिए से आरती उतारते हैं 
भगवान श्रीकृष्ण के जन्म दिन को बहुत ही धूम धाम से मनाया जाता है जन्माष्टमी को श्रीकृष्ण के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। जन्माष्टमी रक्षाबंधन के बाद भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आती है। श्रीकृष्ण देवकी और वासुदेव के आठवें पुत्र थे। उनके जन्म की ख़ुशी की वजह से ही हर साल जन्माष्टमी का त्यौहार मनाया जाने लगा।
 जन्माष्टमी के दिन देश में कई जगहों पर मटकी फोड़ प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जाता है। दही हांड़ी में सभी जगह के बालक भाग लेते हैं। हांड़ी को छाछ और दही से भर दिया जाता है और इसे एक रस्सी की मदद से आसमान में लटका दिया जाता है।
 जिस दिन श्री क्रष्ण जन्माष्टमी होती है उस दिन मन्दिरों को खासतौर पर सजाया जाता है। जिस दिन जन्माष्टमी होती है तब पूरा दिन वृत रखने का विधान होता है। जन्माष्टमी पर सभी लोग 12 बजे तक वृत रखते हैं। जन्माष्टमी के दिन मन्दिरों में झाकियाँ सजाई जाती हैं और भगवान श्री कृष्ण को झूला झुलाया जाता है।
 मथुरा , वृंदावन और ब्रज के अन्य नगरों में यह त्यौहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर तीन -चार दिन पहले से ही मन्दिर सजने शुरू हो जाते हैं। जन्माष्टमी के दिन मन्दिर की शोभा चरमोत्कर्ष पर पहुंच जाता है। 
 हमे श्री कृष्ण के संदेशों को अपनाना चाहिए। जब जब संसार में कष्ट , पाप , अनाचार और भ्रष्टाचार बढ़ता है उसे खत्म करने के लिए कोई न कोई बड़ी शक्ति भी जरुर जन्म लेती है। इसीलिए मनुष्य को हमेशा सत्कर्म में ही लगे रहना चाहिए।

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