प्रदूषण एक विश्वव्यापी समस्या है। विभिन्न कारणों से जल, वायु ध्वनि और मिट्टी का पारस्परिक संतुलन बिगडऩा ही प्रदूषण कहलाता है। वास्तव में मानव द्वारा औद्योगिक वैज्ञानिक चाहत ही प्रदूषण बढ़ाने में कार्यरत है।
देश में बढ़ते नगर तथा महानगर तथा बढ़ती जनसंख्या एक गंभीर समस्या को जन्म देती है। वह समस्या है – प्रदूषण की समस्या। इस जनसंख्या के लिए धरती कम पड़ जाती है। जिसके कारण झुज्गी-झोपडिय़ां, स्लत तथा झोपड़-पट्टियों की संख्या महानगरों में दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। इन स्थाना में वायुमंडल इतना प्रदूष्ज्ञित हो जाता है कि सांस लेने के लिए स्वच्छ वायु भी नहीं मिलती।
महानगरों में कई प्रकार का प्रदूषण है। इसमें सर्वप्रथम आता है- वायु प्रदूषण यह अन्य प्रकार के प्रदूषणों में सबसे अधिक हानिकारक माना गया है। सडक़ों पर चलने वाले वाहन रोज लाखों गैलन गंदा धुआं उगलते हें। जब यह धुआं सांस द्वारा हमारे शरीर में जाता है तो दमा, खंसाी, टी.बी., फेफड़ों और हृदय के रोग कैंसर जैसे घातक रोगों को जन्म देते हैं।
महानगरों में जल भी एक गंभीर समस्या बन गया है नगरों में जल के स्त्रोत भी दूषित हो गए।
महानगरों में ध्वनि प्रदूषण भी कम नहीं होता। वाहनों तथा कल कारखानों से निकलता हुआ शोर, सघन जनसंख्या का शोर तथा ध्वनि विस्तारकों आदि का शोर ध्वनि प्रदूषण के मुख्य कारण है।
भूमि प्रदूषण भी अत्याधिक मात्रा में बड़े-बड़े शहरों में पाया जाता है। घनी आबादी वाले क्षेत्रों में व्याप्त गंदगी भूमि प्रदूषण को जन्म देती है।
शहरों में बढ़े प्रदूषण को रोकना नितांत आवश्यक है। सरकार का प्रयास होना चाहिए कि गांवों में लघु उद्योगों का इस प्रकार विकास करे कि गांवों की जनसंख्या नगरों की ओर पलायन न करे। नगरों में अधिक से अधिक वृक्षारोपण किया जाए तथा हरे-भरे वृक्षों को काटने पर रोक लगाई जाए।
देश में बढ़ते नगर तथा महानगर तथा बढ़ती जनसंख्या एक गंभीर समस्या को जन्म देती है। वह समस्या है – प्रदूषण की समस्या। इस जनसंख्या के लिए धरती कम पड़ जाती है। जिसके कारण झुज्गी-झोपडिय़ां, स्लत तथा झोपड़-पट्टियों की संख्या महानगरों में दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। इन स्थाना में वायुमंडल इतना प्रदूष्ज्ञित हो जाता है कि सांस लेने के लिए स्वच्छ वायु भी नहीं मिलती।
महानगरों में कई प्रकार का प्रदूषण है। इसमें सर्वप्रथम आता है- वायु प्रदूषण यह अन्य प्रकार के प्रदूषणों में सबसे अधिक हानिकारक माना गया है। सडक़ों पर चलने वाले वाहन रोज लाखों गैलन गंदा धुआं उगलते हें। जब यह धुआं सांस द्वारा हमारे शरीर में जाता है तो दमा, खंसाी, टी.बी., फेफड़ों और हृदय के रोग कैंसर जैसे घातक रोगों को जन्म देते हैं।
महानगरों में जल भी एक गंभीर समस्या बन गया है नगरों में जल के स्त्रोत भी दूषित हो गए।
महानगरों में ध्वनि प्रदूषण भी कम नहीं होता। वाहनों तथा कल कारखानों से निकलता हुआ शोर, सघन जनसंख्या का शोर तथा ध्वनि विस्तारकों आदि का शोर ध्वनि प्रदूषण के मुख्य कारण है।
भूमि प्रदूषण भी अत्याधिक मात्रा में बड़े-बड़े शहरों में पाया जाता है। घनी आबादी वाले क्षेत्रों में व्याप्त गंदगी भूमि प्रदूषण को जन्म देती है।
शहरों में बढ़े प्रदूषण को रोकना नितांत आवश्यक है। सरकार का प्रयास होना चाहिए कि गांवों में लघु उद्योगों का इस प्रकार विकास करे कि गांवों की जनसंख्या नगरों की ओर पलायन न करे। नगरों में अधिक से अधिक वृक्षारोपण किया जाए तथा हरे-भरे वृक्षों को काटने पर रोक लगाई जाए।
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