भारतीय संस्कृति की विशेषतांए bhartiey sanskriti ki visheshtaaye 289 words
‘संस्कृतिै’ शब्द ‘संस्कार’ से बना माना गया है।
हमारी इस प्राणवान संस्कृति की अनेक विशेषतांए रेखांकित की जाती हैं। उनमें से समन्वय-भाव या समन्वय-साधना भारतीय संस्कृति की पहली विशेषता मानी गई है,
अनेकता में एकता बनाए रखने की दृष्टि इसी मूलभूत विशेषता की देन है। यहां प्रकृति ने ही भौगोलिक स्तर पर अनेकत्व का विधान कर रखा है। कहीं घने जंगल हैं तो कहीं ऊंचे बर्फीले पर्वतों की पंक्तियां, कहीं रेगिस्तान हैं तो कहीं दूर-दूर तक फैल रहे घने पठार।
इनमें भिन्न वेशभूषा, खान-पान, रीति-रिवाज और भाषा-भाषी लोग निवास करते हैं। उनके धर्म, मत, पंथ, और संप्रदाय भी अलग-अलग है, फिर भी हम सब मलकर अपने आपको भारतीय कहने में ही गौरव का अनुभव करते हैं।
आदर्श घर-परिवार की कल्पना को भी हम केवल भारतीय संस्कृति की ही विशेषता और महत्वपूर्ण देन कह सकत ेहैं।
इस प्रकार सहज मानवीय स्नेह-संबंधों की सारी मानवता को घेर लेना, उसके आद्यंत शुभ की कामना करना भारतीय संस्कृति की एक बहुत बड़ी उपलब्धि, विशेषता और विश्व-मानवता को अनोखी देन है। भारतीय संस्कृति इन तथ्यों के आलोक में जहां अद्वेैतवादी है, वहां वह जीवन जीने के लिए अनेकविध द्वेैतवादी सिद्धांतों पर भी विश्वास करने वाली है। ?
दया, क्षमा, शहनशीलता, निर्लोभ, उदारता, अहिंसा, असंचय, आदि विशेष बातों पर केवल भारतीय संस्कृति ही बल देती है, अन्य कोई नहीं। प्रमुखत: इन्हीं विशेषताओं के कारणों से भारत हर संकट से उबरता रहकर विश्व-रंगमंच पर आज भी अपनी पहचान बनाए हुए हैं। हमारी संस्कृति में वे सब अपने आरंभ काल से ही पाए जाते हैं। आज भी अपनी संपूर्ण ऊर्जा में ज्यों-के-त्यों बने हैं। यही हमारी शक्ति है, अस्तित्व और जीवंतता का प्रमाण है। इन समस्त आंतरिक और समन्वित ऊर्जाओं के कारण ही विश्वभर की संस्कृतियों में भारतीय संस्कृति अजेय एंव अमर है।
‘संस्कृतिै’ शब्द ‘संस्कार’ से बना माना गया है।
हमारी इस प्राणवान संस्कृति की अनेक विशेषतांए रेखांकित की जाती हैं। उनमें से समन्वय-भाव या समन्वय-साधना भारतीय संस्कृति की पहली विशेषता मानी गई है,
अनेकता में एकता बनाए रखने की दृष्टि इसी मूलभूत विशेषता की देन है। यहां प्रकृति ने ही भौगोलिक स्तर पर अनेकत्व का विधान कर रखा है। कहीं घने जंगल हैं तो कहीं ऊंचे बर्फीले पर्वतों की पंक्तियां, कहीं रेगिस्तान हैं तो कहीं दूर-दूर तक फैल रहे घने पठार।
इनमें भिन्न वेशभूषा, खान-पान, रीति-रिवाज और भाषा-भाषी लोग निवास करते हैं। उनके धर्म, मत, पंथ, और संप्रदाय भी अलग-अलग है, फिर भी हम सब मलकर अपने आपको भारतीय कहने में ही गौरव का अनुभव करते हैं।
आदर्श घर-परिवार की कल्पना को भी हम केवल भारतीय संस्कृति की ही विशेषता और महत्वपूर्ण देन कह सकत ेहैं।
इस प्रकार सहज मानवीय स्नेह-संबंधों की सारी मानवता को घेर लेना, उसके आद्यंत शुभ की कामना करना भारतीय संस्कृति की एक बहुत बड़ी उपलब्धि, विशेषता और विश्व-मानवता को अनोखी देन है। भारतीय संस्कृति इन तथ्यों के आलोक में जहां अद्वेैतवादी है, वहां वह जीवन जीने के लिए अनेकविध द्वेैतवादी सिद्धांतों पर भी विश्वास करने वाली है। ?
दया, क्षमा, शहनशीलता, निर्लोभ, उदारता, अहिंसा, असंचय, आदि विशेष बातों पर केवल भारतीय संस्कृति ही बल देती है, अन्य कोई नहीं। प्रमुखत: इन्हीं विशेषताओं के कारणों से भारत हर संकट से उबरता रहकर विश्व-रंगमंच पर आज भी अपनी पहचान बनाए हुए हैं। हमारी संस्कृति में वे सब अपने आरंभ काल से ही पाए जाते हैं। आज भी अपनी संपूर्ण ऊर्जा में ज्यों-के-त्यों बने हैं। यही हमारी शक्ति है, अस्तित्व और जीवंतता का प्रमाण है। इन समस्त आंतरिक और समन्वित ऊर्जाओं के कारण ही विश्वभर की संस्कृतियों में भारतीय संस्कृति अजेय एंव अमर है।
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