गणेश चतुर्थी का दिन विनायक चतुर्थी या विनायक चौथ के नाम से भी जाना जाता है, यह दिन भगवान गणेश को समर्पित है। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार यह दिन मंगलमूर्ति और विघ्नहर्ता भगवान गणेश का जन्म दिवस है। यह पर्व गणेश चतुर्थी के दिन से शुरु होकर पूरे दस दिन तक बहुत ही धूम-धाम से मनाया जाता है।
गणेश चतुर्थी के तथ्य
महान शासक छत्रपति शिवा जी महाराज के शासन काल में इस त्योहार को काफी महत्व मिला था और इसे हिंदू धर्म तथा संस्कृति के मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए सार्वजनिक रुप से काफी जोर-शोर के साथ मनाया जाता था।
इसके पश्चात भारत में अंग्रेजी शासन के दौरान सार्वजनिक स्थलों पर त्योहार मनाने को लेकर कई तरह की पाबंदिया लगा दी गई थी। 1893 में बाल गंगाधर तिलक ने गणेश चतुर्थी के त्योहार को पुनर्जीवित किया और इसे निजी घरेलु समारोह के जगह एक भव्य सामाजिक तथा सार्वजनिक आयोजन का रुप दिया।
गणेश चतुर्थी का महत्व
गणेश चतुर्थी हिंदू धर्म के सबसे प्रमुख त्योहारों मे से एक है और पुरे भारत भर में इसे काफी धूम-धाम के साथ मनाया जाता है और इस त्योहार के दौरान हर तरफ सिर्फ गणपति बप्पा मोरिया का जयकारा सुनने को मिलता है। इस त्योहार की शुरुआत घरो की साफ-सफाई और सजावट के साथ शुरु होती है। महीनों पहले से ही कलाकारों द्वारा प्रतिमाओं का निर्माण शुरू कर दिया जाता है और सामान्य लोगो द्वारा घरो तथा पंडालो को सजाने की तैयारी की जाती है।
यह त्योहार इस लिए भी काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस दिन को भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रुप में मनाया जाता है, जोकि ज्ञान और मंगल कार्यों के देवता हैं। ऐसा माना जाता है कि इस त्योहार पर गणपति स्थापना के साथ भगवान गणेश अपने भक्तों के लिए सौभाग्य लाते हैं और जाते-जाते इन दस दिनो में उनके सभी दुखो और विघ्नों को दूर कर देते हैं।
निष्कर्ष
हर त्योहार की तरह गणेश चतुर्थी का भी अपना महत्व है, यह वह दिन है जो सामाजिक एकता तथा सौहार्द को बढ़ाता है। क्योंकि भगवान गणेश को ज्ञान और विघ्नों को दूर करने वाला देवता माना गया है। इसलिए गणेश चतुर्थी पर्व को मनाने का महत्व और भी बढ़ जाता है।
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