आतंकवाद की समस्या
आतंकवाद एक अत्यंत भयावह समस्या है आतंकवाद केवल विकासशील या निर्धन राष्ट्रों की समस्या हो, ऐसी बात नहीं। विश्व का सबसे शक्तिशाली और समृद्ध राष्ट्र अमेरिका भी इससे बच नहीं पाया है।
दुनिया भर के अलग अलग देशो से रोज ही आतंकी हमलो की खबरे टेलीविज़न और समाचार पत्रों की सुर्खियों का हिस्सा बने रहते है। दुनियाभर की गुप्तचर एजेंसियो द्वारा हर वक्त संदिग्ध गतिविधियों पर यु तो नजर राखी जाती है लेकिन फिर भी आतंकी हमले नहीं रुक रहे। दुनिभर में सेकड़ो आतंकी संगठन हर वक्त मानवता को भयभीत और शर्मशार करने वाली गतिविधिओयो में लगे रहते है। यु तो हर आतंकी संगठन खुद को और खुद की विचार धारा को सदैव सही कहता है लेकिन में नहीं मानती के मानवता को शर्मशार करने वाला कोई भी कदम सही कहा जा सकता है भले ही इसके पीछे कोई हजार तथ्य बताये।
हर आतंकवादी संगठन मुद्दों को लेकर काम करता है ज्यादातर आतंकवादी संगठन धर्म को मुख्या मुद्दा बनाकर अपनी आतंकी साज़िशों को सही करार करते है लेकिन वह यह भूल जाते है के दुनिया का कोई भी धरम आपस में बैर करना या हिंसा नहीं सिखाता।
आतंकवाद मूल में कुत्सित स्वार्थ वृति, घ्रणा, द्वेष, कटुता और शत्रुता की भावना होती होती है। अपना राजनितिक दबदबा बनाए रखना, अपने धर्म को अन्य धर्मों से श्रेष्ठ सिद्ध करने की भावना तथा कट्टर धर्माधता भी आतंकवाद को बढ़ावा देता है।
भारत भी आतंकवाद से जूझता आ रहा है। पहले पंजाब में आतंकवाद पनपा। जब वहां समाप्त हुआ तो आज देश के अनेक महानगरों में फैला गया है। मुंबई बमकांड, असम के उल्फा उग्रवादी संगठन, बोडो संगठन, नागालैंड, मिजोरम,सिक्किम आदि राज्यों में नक्सली संगठन भारत की एकता, अखंडता के लिए खतरनाक गतिविधियाँ होती रहती हैं। अ
आतंकवाद के कारण ही कश्मीर के लाखों पंडित अपना घर-बार तथा व्यापर छोड़ने को विवश हुए। जम्मू कश्मीर के आतंकवादी संगठनों को अनेक ऐसे देशों से सहायता एवं प्रशिक्षण मिलता है जो नहीं चाहते कि भारत उन्नति करे तथा एक शक्ति के रूप में उभरे। ऐसा भी देखा जाता है के आतंकी संगठन भोले भले बेरोजगार युवको को अपने मिथ्या वाक्यों और तथा से प्रभावित कर के उन्हें स्वय के संगठन में शामिल कर लेते है।
आतंकवाद के कारण मानवता का अस्तित्व ही खतरे में पड़ गया है। आतंकवाद को मिटने के लिए दृढ़ संकल्प तथा कठोर कार्यवाही आवश्यक है। यदि भारत को अपनी छाती से आतंकवाद को मिटाना है तो उसे विश्व जनमत की अवहेलना करके भी आतंकवादी प्रशिक्षण शिविरों को समूल नष्ट करना होगा तथा आतंकवाद को जड़ से उखाड़ना फेंकने के लिए जिस प्रकार की कार्यवाही की आवशयकता हो उसके लिए कृतसंकल्प होना पड़ेगा। इस समस्या का समाधान शांति से संभव नहीं है क्योंकि लातों के भूत बातों से नहीं मानते।
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