महंगाईः एक समस्या
भारत जैसे विकासशील राष्ट्रों के लिए बढ़ती हुई महंगाई गंभीर चिंता का विषय है। एक और जहा लोगो की औसतन आय पहले ही कम है उसपर दिन बाद दिन बढ़ती हुई महंगाई की मार से लोगो का जीना दूभर होता जा रहा है।
महंगाई ने आम जनता का जीवन अत्यन्त दुष्कर कर दिया है। यहाँ रोज ही पेट्रोल डीज़ल के ही बढ़ोतरी देखने को मिल जा रही है।
महंगाई के कारण हम अपने दैनिक उपभोग की वस्तुओं में कटौती करने को विवश होते जा रहे हैं।
वेतनभोगियों के लिए तो यह अभिशाप की तरह है।ऐसा नहीं के वेतन में बढ़ोतरी नहीं होती। परन्तु वेतन में बढ़ोतरी से कही जयादा बढ़ोतरी आम जरुरत की समाग्री में हो जाती है।
महंगाई के लिए कुछ हद्द तक तो आम लोगो की अनावश्यक जरूरते भी जिम्मेवार है।
एक अन्य कारन जो महंगाई को प्रभवित करता है वो है रुपये के मुकाबले डॉलर की बढ़ती हुई कीमत। यदि रुपये की कीमत गिरती है तो हर आयात किये सामान पर पहले से ज्यादा शुल्क देना पड़ता है।
सरकार को चाहिए के पेट्रोलियम उत्पाद, माल भाड़ा, बिजली आदि जैसी मूलभूत विषयों पर जब-तब बढ़ोतरी न करे । इन में वृद्धि का विपरित प्रभाव हर वस्तु के मूल्य पर पड़ता है। सरकार की चपलता और आम जनता का सहयोग मिलकर ही महंगाई को नियंत्रित कर सकती है।
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