प्रौद्योगिक उन्नति के साथ ही प्रदूषण एक गंभीर पर्यावरणीय मुद्दा बन गया है जो की पृथ्वी पर जीवन को प्रभावित कर रहा है। प्रदूषण मुख्यतः 4 प्रकार का होता है वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, भू प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण। सभी प्रकार के प्रदूषण निस्संदेह पूरे पर्यावरण को तो हानि पंहुचा ही रहे है साथ ही हमारे जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहे हैं।
वाहनो के बढ़ती संख्या की वजह से हानिकारक और ज़हरीली गैसों का स्तर निरंतर बढ़ता जा रहा है वही दूसरी और कारखाने और खुले में आग जलाना, वायु प्रदुषण के मुख्य कारण हैं। अपनी दिनचर्या को आसान बनाने की चाह में हर कोई वातावरण के साथ खिलवाड़ कर रहा है। ज्यादातर वायु प्रदूषण रोजमर्रा की सार्वजनिक परिवहन के द्वारा होता है। इससे कार्बन डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड विषैली गैसें हमारी वायुमंडल में प्रवेश करती है
कारखानें भी निर्माण प्रक्रिया के दौरान कुछ विषाक्त गैसें, गर्मी और ऊर्जा रिलीज करते है वायु प्रदूषण इंसान और जानवरों में फेफड़ों के कैंसर सहित अन्य सांस की बीमारियां उत्पन्न कर रहीं हैं|
कारखानों, उद्योगो, सीवेज सिस्टम और खेतों आदि के हानिकारक कचरे का सीधे तौर पे नदियों, झीलों और महासागरों के पानी के मुख्य स्रोत में मिलाना ही जल प्रदुषण का कारण है। दूषित पानी पीना गंभीर स्वास्थ्य संबंधी विकार उत्पन्न करता है।
उर्वरक, कवकनाशी, शाकनाशी, कीटनाशकों और अन्य कार्बनिक यौगिकों के उपयोग के कारण भू प्रदूषण होता है। हम मिट्टी में उत्पादित खाद्य सामग्री खाते हैं। उस खाद्य सामग्री के जरिये हानिकारक उर्वरक और कीटनाशक हमारे शरीर में प्रवेश करते है और भयानक बीमारियों को जनम देते है
भारी मशीनरी, वाहन, रेडियो, टीवी, स्पीकर आदि द्वारा उत्पन्न ध्वनि, ध्वनि प्रदूषण के कारण है जो की सुनने की समस्याओ और कभी कभी बहरापन का कारण बनती हैं।
प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के लिए संयुक्त प्रयास की आवश्यकता है जिससे की हम एक स्वस्थ्य और प्रदुषण मुक्त वातावरण पा सके।
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