ईद-उल-फितर पर निबंध
Eid
ईद-उल-फितर पर अथवा ईद का त्योहार मुस्लिम समुदाय का मुख्य त्योहार है।
ईद का त्यौहार मुसलमानों का सबसे पवित्र एवं बड़ा त्यौहार होता है।
यह रमजान का महीना पूरा हो जाने के बाद मनाया जाता है।
मुस्लिम लोग एक महीने तक रोजा रखते हैं। रोजे के दिनों में मुस्लिम धर्मानुयायी पूरे नियमों से खुदा की इबादत करते हैं तथा पांचों वक्त की नमाज अदा करते हैं। ।
सभी मुसलमान इस त्योहार को बड़ी धूम-धाम से विशेष तैयारी के साथ मनाते हैं।
अमीर-गरीब, जवान या बूढ़ा सभी जनोें में बराबर उत्साह देखा जा सकता है। सभी अपनी शक्ति व सामथ्र्य एंव रूचि के अनुसार नए वस्त्र, नए आभूषण, जूते, चप्पल व अन्य भौतिक सुख की सामग्री की खरीददारी करते हैं।
चारों ओर फलों व मिठाईयों की दुकानों मे लंबी भीड़ देखी जा सकती है। वातावरण मे एक नई रौनक आ जाती है।
ईद के दिन प्रातःकाल बच्चे, युवक, बुढ़े सभी स्वच्छ कपड़ों में एक निश्चित समय पर ईदगाह में एक साथ नमाज पढ़ते है। नमाज अदा करने के उपरांत सभी लोग एक-दूसरे को गले लगाते हैं तथा ईद की मुबारकबाद देते हैं। इसके साथ ही दावतों का सिलसिला शुरू हो जाता हैं लोग नाना प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद उठाते हैं तथा अपने निकट संबंधियों में इसका आदान-प्रदान भी करते हैं।
रमजान का महीना और उसके पश्चात् ईद का पावन पर्व सभी के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखता है। यह मन की पवित्रता एंव उसकी शुद्धता हेतु मनुष्य को प्रेरित करता है।यह त्योहार हमें भाईचारे तथा एक-दूसरे से प्रेम करने की सीख देता है।
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